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चार्ल्स डार्वीन - विनोद कुमार मिश्रा

चार्ल्स डार्वीन - विनोद कुमार मिश्रा (120125)



चार्ल्स डार्वीन ला लहानपणापासून पशू पक्षी कीटक यांचे निरीक्षण करणे त्यांना हाताळणे याची आवड होती.
चार्ल्स डार्विन चे आजोबा आणि वडील दोघेही प्रथितयश डॉक्टर होते. आपल्याप्रमाणेच चार्ल्स ने डॉक्टर व्हावे ही त्याच्या वडिलांची इच्छा होती. वडिलांच्या इच्छेखातर चार्ल्स ने डॉक्टर कीच्या अभ्यासक्रमाला सुरुवात ही केली होती. एकेदिवशी लहान मुलाची surgery होतं असताना चार्ल्स उपस्थित होता, त्यावेळी भुल तंत्रज्ञान विकसित झाले नव्हते. त्या मुलाच्या वेदना, ओरडणं पाहून चार्ल्स तेथून पळून गेला आणि डॉक्टर न होण्याचा निश्चय केला.

मग त्याने ख्रिश्चन धर्म गुरु होण्याच्या अभ्यासक्रमात नाव नोंदवलं. यातच वयाच्या 22 व्या वर्षी त्याला वैज्ञानिक संशोधनाच्या साहसी मोहिमेवर जाण्याची संधी मिळाली. धर्मगुरू आणि ही साहसी मोहीम याचा अर्थाअर्थी संबंध नाही असं म्हणून चार्ल्सच्या वडिलांनी परवानगी नाकारली होती. शेवटी चार्ल्स च्या आग्रहापुढे त्यांचाही नाईलाज झाला.

तीन वर्षासाठी असलेली ही सागरी मोहीम तब्बल पाच वर्षे चालली. चार्ल्सने जगभरातील जैवविविधतेचे निरीक्षण करून त्यांच्या नोंदी ठेवल्या आणि निष्कर्ष काढला, ज्यामुळे जगाची धारणा बदलली आणि इतिहास घडला.
The theory of evolution and(उत्क्रांती वादाचा सिद्धांत )
The theory of natural selection (नैसर्गिक निवडीचा सिद्धांत )


👉🏻डार्विनने बिगलच्या मोहिमेवर गॅलापागोस बेटांवरचे निरीक्षण केले, ज्यामुळे त्याला जीवसृष्टीच्या उत्क्रांतीचा विचार करण्यास प्रवृत्त केले.
गॅलापागोस बेटे इक्वेडोर देशाच्या पश्चिमेला एक हजार किलोमीटरवर आहेत. या 18 बेटांच्या समूहाला चार्ल्स ने भेट दिली असता तेथील निरीक्षण आणि नोंदीने तो हरखून गेला होता.



https://youtu.be/Fla6Xvslalo?si=jCSpcLBk5HhCS1Sr

💡पुस्तकातील उतारे 

👉🏻 चार्ल्स डार्विन ची शाळेतील प्रगती असमाधानकारक होती. त्याच्या प्रगती पुस्तकावरील शिक्षकांचा शेरा 
"टिप्पणी—चार्ल्स एक दब्बू बच्चा है। वह दूसरे बच्चों के साथ घुल-मिल नहीं पाता है। वह सिर्फ फूल, पत्ते, चींटी, कीड़े आदि इकट्ठे करने में लगा रहता है।"

👉🏻अनादि माने जाने वाले सनातन धर्म जिसे हिंदू धर्म के नाम से भी जाना जाता है में कल्पना है कि ब्रह्म ने सृष्टि की रचना की और मनु और श्रद्धा की रचना की। आदि पुरुष व आदि स्त्री माने जाने वाले मनु और श्रद्धा को आज भी पूरे श्रद्धा व आदरभाव से पूजा जाता है क्योंकि हम सब इन्हीं की संतान माने जाते हैं। उसी तरह अति प्राचीन यहूदी धर्म, लगभग दो हजार वर्ष पुराने ईसाई धर्म और लगभग तेरह सौ वर्ष पुराने इसलाम धर्म में आदम और हव्वा को आदि पुरुष और आदि स्त्री माना जाता है। उनका नाम भी पूरे आदर से लिया जाता है क्योंकि सभी उनकी ही संतान माने जाते हैं।

👉🏻जब चार्ल्स मात्र आठ वर्ष का था तब उसकी माता सूजनाह इस दुनिया से चल बसीं। चार्ल्स को इस गहरे आघात का कोई खास एहसास नहीं हो पाया। वह अपनी ही दुनिया में खोया था और कंचे, सिक्के, डाक-टिकट, पौधे, चिड़ियों के अंडे आदि एकत्रित करता रहता था। धीरे-धीरे वह मरे हुए कीड़ों को इकट्ठा करने लगा। उसकी बड़ी बहन ने उसे बतला दिया था कि जीवित प्राणियों को नहीं मारना चाहिए और वह इसका पालन करता था।

👉🏻चार्ल्स डारविन को व्यावहारिक ज्ञान पहले-पहल तब हुआ जब उसे एडिनबर्ग अस्पताल में सर्जरी के दौरान भेजा गया। पहली बार तो उसने झेल लिया पर दूसरी बार ऑपरेशन थियेटर में बच्चे का ऑपरेशन होना था। उन दिनों तक क्लोरोफार्म का आविष्कार नहीं हुआ था। बच्चे को दर्द से तड़पते देखकर चार्ल्स ऑपरेशन थियेटर से तो क्या अस्पताल से ही भाग गया और दोबारा लौट कर नहीं आया। वह वीभत्स दृश्य चार्ल्स को लंबे समय तक सताता रहा। चार्ल्स ने ठान लिया कि वह डॉक्टर नहीं बनेगा। उसे यह भी पता था कि उसके पिता के पास अथाह जायदाद व पैसा है जिसके सहारे वह जीवन गुजार सकता है। अब उसने फैसला कर लिया कि वह वही करेगा जो उसे पसंद है। वह समुद्र के किनारे निकल जाता था और समुद्री जंतुओं से संबंधित विषयों का व्यावहारिक अध्ययन करता था।

👉🏻वास्तव में ब्रिटिश नौसेना के एक कैप्टेन राबर्ट फिट्जराय एक वैज्ञानिक अनुसंधान मिशन पर जाना चाहते थे। उनके पास इस लक्ष्य के लिए एक विशेष जलयान था एच.एम.एस. बीगल। इसके जरिए वे दुनिया के बड़े भाग का भ्रमण करके तमाम प्राकृतिक विज्ञान संबंधी जानकारियाँ एकत्रित करना चाहते थे।

👉🏻HMS बिगल 27 डिसेंबर 1831 ला संशोधन मोहिमेवर निघालं. 2 ऑक्टोबर 1836 ला परतलं.

👉🏻जनवरी 1844 में चार्ल्स डारविन ने हूकर को अपने जीवोत्पत्ति सिद्धांत का सार सुनाया। उन्होंने विभिन्न जीवाश्मों, वनस्पतियों, प्राणियों से संबंधित अपना अध्ययन सामने रखा। उन्होंने यह भी बताया कि उपरोक्त परिणामों के आधार पर स्पष्ट है कि विकास की प्रक्रिया प्रारंभ से चल रही है और आगे भी चलेगी।

👉🏻हूकर से डारविन की मित्रता इतनी पक्की हो चुकी थी कि अब वे अपनी हर परेशानी और हर उपलब्धि को उनके साथ बाँटते थे। वे रोज सवेरे डिसेक्सन टेबल (जिस पर रखकर प्राणियों की चीर-फाड़ की जाती है) पर बैठ जाते थे और एक-एक प्राणी के शरीर की चीर-फाड़ करके उसका बारीकी से अध्ययन किया करते थे। इसके लिए वे माइक्रोस्कोप का भी प्रयोग करते थे जो उनके पास ही रहता था। कमजोर शरीर के कारण चीर-फाड़ करना और फिर माइक्रोस्कोप द्वारा अवलेकन करना कठिन कार्य था पर वे आठ वर्षों तक लगातार इस काम को करते रहे। इस क्रम में उन्होंने हर प्राणी का बड़ी बारीकी से अध्ययन किया। उस समय विभिन्न प्रजातियों को जो नाम दिए गए थे वे सार्थक नहीं थे। डारविन ने लगातार अध्ययन के बाद गुणों के आधार पर उन्हें वर्गीकृत किया।

👉🏻आखिर दुनिया की महानतम् व अधिकतम प्रभावशाली पुस्तक तैयार हो ही गई। 24 नवंबर, 1859 को ‘‘ओरिजिन ऑफ स्पेसीज’’ शीर्षक प्रकाशित हो गई।

👉🏻सत्य तो तभी निखरेगा जब वह चारों ओर से तमाम प्रहार झेलते हुए ऊपर उठेगा।

👉🏻डारविन ने निष्कर्ष निकाला कि मनुष्य व उच्च श्रेणी के प्राणियों जैसे बंदर, वनमानुष आदि में समझने, भाँपने, आशंका व्यक्त करने, संवेदना अनुभव करने आदि के गुण एक जैसे ही होते हैं।

👉🏻डारविन ने अब निष्कर्ष निकाला कि निम्न-श्रेणी के प्राणी मनुष्य से इसलिए कमतर कहे जा सकते हैं क्योंकि वे विविधतापूर्ण विचार ध्वनि के जरिए व्यक्त नहीं कर पाते हैं। इसका कारण उनकी सीमित मानसिक शक्ति है। उन्होंने यह भी निष्कर्ष निकाला कि नैतिकता की समझ और अंतरात्मा की आवाज जैसे गुण मनुष्य में इसलिए बढ़ते चले गए क्योंकि उसका मानसिक विकास होता चला गया। यदि हम नवजात शिशु के विकास को ध्यान से देखें तो पाएँगे कि विशिष्ट मानवीय गुण इसमें समय के साथ विकसित होते हैं।

👉🏻1. क्या आप वास्तव में ऐसा मानते हैं कि सृष्टि के प्रारंभ में ऐसे मौलिक परमाणु थे जिन्होंने एकाएक जिंदा ऊतकों का रूप धारण कर लिया?
 2. क्या आप मानते हैं कि सृष्टि-सृजन के समय एक व्यक्ति उत्पन्न हुआ था या अनेक?
 3. जगत् में जो असंख्य किस्म के चराचर प्राणी हैं वे किसी बीज से या किसी अंडे से उत्पन्न हुए थे या पूर्ण सामान्य रूप में?

👉🏻दुःख, प्रसन्नता, क्रोध व अन्य भावनाएँ सभी मनुष्यों की एक जैसी होती हैं। चाहे वे कहीं भी रहते हैं और कितने ही कम या ज्यादा सभ्य हों। 2. आँसू, मुस्कान, क्रोध का ज्वार सभी मनुष्यों में एक से भाव उत्पन्न करता है। इस प्रकार डारविन ने एक और तथ्य उजागर किया कि सभी लोग एक ही मूल माता-पिता की संतानें हैं और बाद में मूल (रेस) बने।

👉🏻12 फरवरी, 1882 को उनका तिहत्तरवाँ जन्म-दिवस मनाया गया। उस दिन तमाम लोगों ने उन्हें बधाई दी। पर बधाई देते समय उन्हें ऐसा लग रहा था कि यह उनके जीवन की अंतिम बधाई है। सर्दियाँ बीतीं, बसंत आया। वनस्पतियाँ लहलहाने लगीं। फूल खिलने लगे पर डारविन की तबियत बिगड़ने लगी। चंद दिन बिस्तर पर रहने के पश्चात् 19 अप्रैल, 1882 को हृदयगति रुक जाने से उनका उनके प्रिय निवास स्थान ‘डाउन’ में निधन हो गया।

👉🏻औपचारिक शिक्षा से वंचित पर दृढ़ संकल्प के धनी चार्ल्स ने जब यात्रा प्रारंभ की तो वह मात्र बाइस वर्ष का था और उसके मन में अथाह जिज्ञासाएँ थीं।

👉🏻मनुष्य जिस चीज से प्रेम करने लगता है, वह चीज उसे अत्यंत नाजुक लगने लगती है और उसे लगातार आशंका बनी रहती है कि वह नष्ट न हो जाए।

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